Sunday, 8 January 2017

Miracles in Indian Temples | इन चमत्कारी मंदिरों में से तो कुछ ऐसे मंदिर भी जिनके रहस्य विचित्र है तथा आज भी उन पर वैज्ञानिक शोध कर रहे है |

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Miracles in Indian Temples |  Mystery of  Indian Temple

इन चमत्कारी मंदिरों में से तो कुछ ऐसे मंदिर भी जिनके रहस्य विचित्र है तथा आज भी उन पर वैज्ञानिक शोध कर रहे है |

Miracles in india kasardevi temple के बारे में हम आज बात करेंगे कि kasardevi nasa की क्या महत्ता है । वैज्ञानिक kasardevimandir के बारे में क्या शोध कर रहे हैं। Kasardevimandi के इतिहास के बारे kasardevi history लोगों कापने विचार और आस्था है। How to reach kasardevi तक जाने के लिए पर्यटक बहुत दूर दूर  से लोग आते हैं।  Kasardevi का मंदिर kasardevialmora के नाम से भी जाना जाता है।  

  इसी तरह आज हम ऐसे कई दिव्य मंदिरों के विषय में बात करेंगे -


1. कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा - उत्तराखंड


Kasaar Devi Ka Prasidh Mandir 

कसार देवी मंदिर के बारे में कहा जाता है की यहाँ आने वाले भक्तो की हर मनोकामना तुरंत पूरी होती है  यहाँ कुदरत की खूबसूरती के साथ ही एक अद्भुत अनुभव का अहसास भी होता है । अल्मोड़ा से लगभग 10 किलो मीटर की दुरी पर अल्मोड़ा बिनसर मार्ग पर स्थित कसार देवी के आस पास पाषण मिलेंगे । 

यहां आकर श्रद्धालु असीम मानसिक शांति का अनुभव करते हैं ।  ऐसा क्यों? क्योंकि यह अद्वितीय और चुंबकीय शक्ति का केंद्र भी है अनूठी मानसिक शांति मिलने के कारण यहां देश-विदेश से कई पर्यटक आते हैं । 
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड में अल्मोड़ा स्थित कसार देवी शक्तिपीठ, दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग अद्भुत चुंबकीय शक्ति के केंद्र हैं  इन तीनों जगहों पर चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज है। नासा के वैज्ञानिक चुम्बकीय रूप से इन तीनों जगहों के चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं । 

पर्यावरणविद डॉक्टर अजय रावत ने भी लंबे समय तक शोध करने के बाद बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है । इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं । 

पिछले 2 साल से नासा के वैज्ञानिक इस बेल्ट के बनने के कारणों को जानने में जुटे हैं । इस वैज्ञानिक अध्ययन में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मानव मस्तिष्क या प्रकृति पर इस चुंबकीय पिंड का क्या असर पड़ता है?

कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद 1890 में ध्यान के लिए कुछ महीनों के लिए आए थे । बताया जाता है कि अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर काकड़ीघाट में उन्हें विशेष ज्ञान की अनुभूति हुई थी । इसी तरह बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर विशेष साधना की थी । हर साल इंग्लैंड और अन्य देशों से अब भी शांति प्राप्ति के लिए सैलानी यहां आकर कुछ माह तक ठहरते हैं । 

2 .हिंगलाज माता मंदिर - बुलिचस्तान


Hinglaj Mata Ka Mandir

Hinglaj Mata temple पाकिस्तान में स्थित बुलिचस्तान के जिला लसबेला में हिंगोल नदी के किनारे पहाड़ी गुफा में माता पार्वती का अति प्राचीन हिंगलाज hinglajdev मंदिर स्थापित है  माता का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है  इस मंदिर के महत्व का उल्लेख देवी भागवत पुराण के साथ-साथ अन्य पुरानो में भी मिलता है । 

भारत  पाकिस्तान के बटवारे के समय पाकिस्तान में स्थित कई धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर व मंदिर तोड़ दिए गए  माता हिंगलाज के मंदिर को भी कटरपंथियो द्वारा तोड़ने का प्रयास किया गया परन्तु माता के इस मंदिर के चमत्कार से वे मोत के मुंह में समा गए  माता हिंगलाज के इस चमत्कारिक मंदिर की देख रेख मुसलमानो द्वारा की जाती है। 

ऐसी मान्यता है की इस चमत्कारी मंदिर में आकर जो कोई भी भक्त अपनी मनोकामना माता हिंगलाज hinglajdevi temple in pakistan history in hindi hinglajdevimandir के सम्मुख रखता है  । वह अवश्य ही पूरी होती है यहाँ वर्ष में एक बार भारत एवं पाकिस्तान के हिन्दू यात्रा करते है  माता हिंगलाज के इस मंदिर में अनेक चमत्कारी शक्ति व्याप्त है। 


3 .जगन्नाथ मंदिर - उड़ीसा


Jagan Nath Puri Mandir

Jagannath Puri Mandir हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध 7 पवित्र नगरियों में से एक जगन्नाथ पूरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर स्थित है । जगन्नाथ का यह मंदिर भगवान विष्णु के 23 वे अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है पुराणों के अनुसार इसे वैकुंठ धाम भी कहा गया है तथा इसे भगवान विष्णु के चार धामों में से एक माना जाता है। 

इसे श्री क्षेत्र, श्रीपुरुषोत्तम क्षेत्र, शाक क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरि और श्री जगन्नाथ पुरी भी कहते हैं । यहां लक्ष्मीपति विष्णु ने तरह-तरह की लीलाएं की थीं । 

यहाँ देश विदेश से दर्शन को आये श्रृद्धालु को एक अलग से अहसास की अनुभूति प्रदान होती है । भक्त यहाँ अपनी अपनी मनोकामनाएं लेकर आते है और वे सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है । 

4 .महाकाली शक्तिपीठ पावागढ़ - गुजरात


Maha Kali Shaqti Pith

गुजरात की उच्ची पावगढी पहाड़ियों पर स्थित माता काली का शक्तिपीठ सबसे जाग्रत कहा जाता है. यहाँ स्थित माँ काली को महाकाली के नाम से पुकारा जाता है, माता का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है यहाँ देवी सती के दाहिने पैर की उंगलियां गिरी थी । 

यह मंदिर गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपारण्य के पास स्थित है, जो वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. पावागढ़ मंदिर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है  रोप-वे से उतरने के बाद आपको लगभग 250 सीढ़ियां चढ़ना होंगी, तब जाकर आप मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचेंगे । 

5 .मेहंदीपुर बालाजी मंदिर - राजस्थान


Mehndipur Bala Ji

Mehndipur Bala Ji राजस्थान के दौसा जिले के दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ घटा मेहंदीपुर नामक स्थान है जहां पर एक बहुत बड़ी चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वतः ही चमत्कारी रूप से उभर आई है, जो भक्तो के मध्य श्री बालाजी महाराज के नाम से प्रसिद्ध है । इसे हनुमानजी के बाल स्वरूप में पूजा जाता है। बालाजी के चरणों में एक छोटी सी कंडी है इसका जल कभी समाप्त नहीं होता है । 

यहां के हनुमानजी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है  यहां हनुमानजी के साथ ही शिवजी और भैरवजी की भी पूजा की जाती है।

जनश्रुति है कि यह मंदिर करीब 1,000 साल पुराना है. यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी  इसे ही श्री हनुमानजी का स्वरूप माना जाता है । 

आशा करती हूँ कि आपको ये पोस्ट पसंद आया होगा । अपने भाग्य को अजमाने और सभी देवी-देवताओं के आशीर्वाद पाने के लिए इनका ध्यान और पूजन अवश्य करें । अपने सुझाव और विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरुर दें ।   

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